मेरी बस एक ही चाहत है कि खुद को इतना सक्षम बना सकूं कि मुझे देखकर कोई यह न सोचे कि मैं एक लड़की या महिला हूं- तपस्या परिहार

मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव की तपस्या एक ऐसी जगह से संबंधित हैं जहां लड़की होने का मतलब होता है, समय से विवाह। जिस दिन किसी के घर में बेटी का जन्म होता है, उस दिन से उसके घरवालों का एकमात्र लक्ष्य बन जाता है, शादी करके उसे सेटल कर देना। लेकिन तपस्या किस्मत की धनी थीं। इस गांव में रहने के बावजूद उनके परिवार की सोच ऐसी नहीं रही। बल्कि उन्हें तो उनके परिवार ने हर उस कदम पर सपोर्ट किया जब उन्हें जरूरत पड़ी। पढ़ाई का हर संसाधन उपलब्ध कराया और उनसे ज्यादा उन पर विश्वास जताया कि वे इस परीक्षा को पास कर सकती हैं। शायद इसी विश्वास का नतीजा था कि अपने दूसरे प्रयास में ही तपस्या ने यूपीएससी परीक्षा न केवल पास की बल्कि बहुत अच्छी रैंक भी लायीं। जानते हैं तपस्या से उनकी सफलता का सीक्रेट।

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बचपन से थीं होनहार

तपस्या ने अपनी स्कूली शिक्षा केन्द्रीय विद्यालय, नरसिंहपुर से की। उन्होंने इंडिया लॉ सोसाइटी के लॉ कॉलेज, पुणे से कानून की पढ़ाई की और दिल्ली में पढ़ाई करते हुए यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। तपस्या के मुताबिक, यूपीएससी परीक्षा के लिए यह उनका दूसरा प्रयास था।

अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता विश्वास और अपनी माँ को देते हुए, तपस्या ने कहा कि उनका परिवार हमेशा उनका समर्थन करता रहा है। उन्होंने कभी भी पढ़ाई के लिए कभी ना नहीं कहा।

अपनी सफलता के मंत्र पर उन्होंने कहा, “मैं एक असाधारण छात्रा नहीं रही, लेकिन हमेशा कड़ी मेहनत में विश्वास करती थी। मैंने हमेशा उस विषय को अच्छी तरह से समझने की कोशिश की जिसका मैंने अध्ययन किया था। मेरी सफलता के पीछे यही कारण था।”

दादी बनीं सबसे बड़ी मोटिवेटर

अपने घर में बच्चों में सबसे बड़ी तपस्या को कभी उन आम समस्याओं को सामना नहीं करना पड़ा जो लड़कियों के साथ होती हैं कि इन्हें न पढ़ाओं, या बाहर न भेजो या जल्दी शादी कर दो। और तो और तपस्या की दादी देवकुंवर परिहार उन्हें सबसे ज्यादा प्रेरित करती थीं और उन पर विश्वास जताती थीं कि तुम परीक्षा पास कर सकती हो। अपने परिवार के प्यार और सपोर्ट और खासकर दादी की बातों से तपस्या का हौंसला और बढ़ जाता था। वे ज्यादा मेहनत करने के लिए तैयार हो जाती थीं। तपस्या ने दिल्ली में रहकर करीब ढ़ाई साल तक इस परीक्षा की तैयारी की, जिसमें उन्होंने दो अटेम्पट दिए। दूसरे अटेम्पट में उनका चयन हुआ। पहले अटेम्पट में तपस्या प्री परीक्षा भी पास नहीं कर पायी थीं।

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कोचिंग को नहीं मानती जरूरी

तपस्या यूपीएससी परीक्षा के लिए कोचिंग को जरूरी नहीं मानतीं। वे कहती हैं कि इस परीक्षा में सेल्फ स्टडी का बहुत महत्व है। कोचिंग में बहुत सारे कैंडिडेट्स होते हैं, हर कैंडिडेट पर टीचर का ध्यान देना संभव नहीं। जबकि इस परीक्षा के लिए आपको खुद पर ही फोकस करना है। यहां तक कि तपस्या तो पहले अटेम्पट में सेलेक्ट न होने कारण भी कोचिंग को ही मानती हैं। वे कहती हैं, ‘मैं कोचिंग के भरोसे बैठी थी, कि वे सबकुछ कराएंगे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उनके पास इतने कैंडिडेट्स होते हैं कि आप पर इंडीविजुअल ध्यान कोई नहीं देता। बेहतर होगा सेल्फ स्टडी करें’। इस मंत्र के साथ तपस्या ने साल 2017 में 23वीं रैंक के साथ यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की।

16 घंटे पढ़ाई संभव नहीं

दूसरे कैंडिडेट्स को टिप्स देते समय तपस्या कहती हैं, ‘पता नहीं लोग कैसे 14 से 16 घंटे पढ़ लेते हैं, मैंने कभी इतनी पढ़ाई नहीं की। मैं रोज़ के रोज़ अपनी स्ट्रेटजी बनाती थी और उसी के अनुरूप चलती थी। प्री के पहले मैंने 8 से 10 घंटे पढ़ाई की है जो मेन्स के समय 12 घंटे तक पहुंची पर इससे ज्यादा नहीं’। उनके मुताबिक जरूरी है रोज़ पढ़ना, अपनी गलतियों से सीखना और रिसोर्सेस लिमिटेड रखकर खूब रिवीजन करना। टॉपर्स के इंटरव्यू देखें, उनसे सीखें पर अपने लिए जो बेस्ट हो वही स्ट्रेटजी बनाएं। ऑप्शनल में लॉ लेने वाली तपस्या को साल 2017 का पेपर देने के बाद कतई यकीन नहीं था कि वे चयनित हो जाएंगी क्योंकि उनके अनुसार वे परीक्षा में अपना 100 प्रतिशत नहीं दे पायी थीं पर तपस्या अच्छी रैंक के साथ सेलेक्ट हुयीं। दूसरे कैंडिडेट्स को तपस्या यही सलाह देती हैं कि इस परीक्षा को पास करने का बस एक ही सीक्रेट है, कड़ी मेहनत। पूरी ईमानदारी और लग्न से प्रयास करने पर यह परीक्षा पास की जा सकती है।



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