‘रो-रो फेरी सेवा’ की 10 रोचक बातें, देश में पहली बार ऐसी सर्विस शुरु हुई है

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ro ro ferry

1-रो-रो फेरी सेवा (‘roll-on, roll-off (ro-ro)’ ferry service) सौराष्ट्र के भावनगर जिले के घोघा को दक्षिण गुजरात के भरूच के दाहेज से जोड़ेगी। तीन चरणों की इस योजना के पहले चरण का उद्धाटन 22 अक्टूबर 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। उन्होंने ही इसकी नींव साल 2012 में रखी थी। तब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

2-रो-रो फेरी सर्विस प्रोजेक्ट दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी रो-रो सेवा है। पहले चरण पर कुल लागत 614 करोड़ की आई है। भारत में पहली बार इस तरह की किसी सेवा की शुरुआत हुई है।

3-सागरमाला प्रोजेक्ट के अंतर्गत केंद्र सरकार ने घोघा और दाहेज के बंदरगाहों के समतलीकरण के लिए 117 करोड़ रू. आवंटित किये हैं।

4-रो-रो फेरी सेवा में पहले चरण में सिर्फ यात्री सेवाएं शुरू की गई है। दूसरे चरण में हल्के वाहनों के लिए सर्विस शुरू करने की योजना है। आखिरी चरण में भारी वाहनों के लिए इस सर्विस को तैयार किया जाएगा।

5-रो-रो फेरी सेवा शुरू होने से सौराष्ट्र के घोघा और दक्षिण गुजरात के दाहेज के बीच दूरी सिर्फ 17 नॉटिकल मील (समुद्री दूरी) यानी 32 किलोमीटर रह जाएगी। अभी ये दूरी करीब 360 किलोमीटर है।

6-सड़क मार्ग से इस दूरी को तय करने के लिए अभी करीब 8 घंटे का वक्त लगता है। लेकिन रो-रो फेरी सर्विस के बाद ये दूरी सिर्फ 1 घंटे में तय होगी। यानी यात्रा में 7 घंटे का समय बचेगा। इससे दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र के बीच रोज यात्रा करनेवाले 12 हजार लोगों को फायदा मिलेगा।

7-देश में पहली बार इस तरह कोई सेवा शुरू हुई है। एक बार में 100 वाहनों (टू-व्हीलर से लेकर ट्रक तक) के साथ ही करीब ढाई सौ यात्रियों को दोनों बंदगाहों के बीच ले जाया जा सकेगा।

8-रो-रो सेवा की खासियत ये है कि इसमें जहाज पर पहिए वाले वाहनों को चलाकर चढ़ाया और उतारा जा सकता है। इसके लिए बंदरगाहों पर बाकायदा रैंप बनाए जाते हैं। रैंप की वजह से इन्हें क्रेन से उठाने की जरुरत नहीं पड़ती है। कार, ट्रक, सेमी ट्रेलर ट्रक, ट्रेलर और रेलरोड कार भी शामिल हैं।

9-रो-रो सेवा के ठीक उलट बंदगारों पर लो-लो (Lift ON, Lift OFF) सेवा होती है। इसमें सामानों और वाहनों को क्रेन से उठाकर जहाज पर लादा और उतारा जाता है। इसमें वक्त की बर्बादी के साथ ही लागत भी ज्यादा आती है।

10-रो-रो सेवा से सबसे ज्यादा फायदा सौराष्ट्र के हीरा कारोबारियों और कामगारों को मिलेगा। क्योंकि सूरत में हीरा काटने, तराशने और पालिश करनेवाले कारीगरों की सबसे ज्यादा संख्या सौराष्ट्र से है। अब ये लोग सुबह काम पर जा कर शाम को लौट सकते हैं।

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