स्कूल में रहते हुए IAS कि तैयारी कैसे करें?

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बच्‍चा जब छोटी कक्षा में होता है, तो अक्‍सर उसके माता-पिता, अध्‍यापक, पास-पड़ोस इत्‍यादि उससे पूछते हैं कि ‘बेटा बड़े होकर क्‍या बनोगें’ बच्‍चा भी समय-समय पर जिससे अधिक प्रभावित होता है, उसके अनुसार कभी डॉक्‍टर, कभी इंजीनियर तो कभी कलेक्‍टर बनने की बात करता है।

ऐसे बहुत कम ही बच्‍चे होते हैं, जो बचपन से ही किसी उद्देश्‍य का चयन करें, लेकिन जब बच्‍चा हाई स्‍कूल में पहुंचता है तो उसके विचारों और निर्णय में दृढ़ता आने लगता है।

यह दृढ़ता इंटर पास करते-करते कहीं न कहीं स्‍वरूप भी ग्रहण करने लगती है। अत: वे छात्र जिन्‍होंने बचपन में कलेक्‍टर या उच्‍चाधिकारी बनने का सपना देखा हो, यदि हाई स्‍कूल के बाद इंटर में पहुंचते ही सोचने एवं इस सोच हेतु प्रयास करने लगे तो उनके सफल होने की संभावना अपेक्षाकृत देर से सोचने वाले छात्रों से थोड़ा अधिक रहता है। इन छात्रों के अधिक सफल होने की संभावना के लिए कई कारण होते हैं, जैसे- किशोरावस्‍था में मनुष्‍य का तीव्र शारीरिक विकास एवं मानसिक विकास होता है।

किशोरवय छात्र अत्‍यन्‍त भावुक प्रवृत्ति के होते हैं। अत: इन्‍हें जिस किसी कार्य में लगाया जाता है, उसके प्रति वे पूर्णत: समर्पित रहते हैं और “पूर्ण समर्पण की भावना से किए गए कार्य के असफल होने की संभावना कम ही होती है।” यही कारण है कि विश्‍व के अधिकांश देशों में सैनिक सेना में जाने के लिए यही आयु उपयुक्‍त मानी जाती है। भारत में नागरिक सेवा परीक्षा प्रक्रिया में सुधार से संबंधित वाई. के. अलध समिति ने भी नागरिक सेवा परीक्षा हेतु आयु सीमा कम करने की सिफारिश की थी।

पिछले कुछ वर्षों में भारत में सिविल सेवा परीक्षा को लेकर छात्रों और उनके माता-पिता में जागरूकता बढ़ी है। अब अभिभावक भी अपने बच्‍चों को डॉक्‍टर, इंजीनियर की तैयारी की भांति सिविल सेवा हेतु भी पहले से ही तैयार करना चाहते हैं।

पिछले कुछ वर्षों से आईएएस परीक्षा में ऐसे अभ्‍यार्थियों की संख्‍या में भी लगातार वृद्धि हुई है जो अपने प्रथम प्रयास में ही सफल हुए हैं। ऐसे छात्रों ने अपने चयन के बाद दिए साक्षात्‍कार में बताया कि उन्‍होंने कक्षा आठ या हाई स्‍कूल से ही इस हेतु रणनीति बनाकर तैयारी शुरू कर दी थी। इसी का परिणाम इनको प्रथम प्रयास में ही सफलता के रूप में मिला।

अब बात करते हैं वैसे छात्रों की जो इंटर में है या इंटर में पहुंचने वाले हैं। ऐसे छात्र यदि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं तो उनके लिए आईएएस परीक्षा का वर्तमान में बदला स्‍वरूप स्‍वर्णिम अवसर प्रदान करता है। आईएएस की वर्तमान परीक्षा प्रणाली, जिस पर आगे विस्‍तृत रूप से चर्चा की जाएगी। प्रारम्भिक परीक्षा में दो प्रश्‍न-पत्र सामान्‍य अध्‍ययन, द्वितीय सीसैट (सिविल सर्विसेस एप्टिट्यूट टेस्‍ट) का होता है, जबकि मुख्‍य परीक्षा में एक वैकल्पिक विषय के साथ सामान्‍य अध्‍ययन के चार प्रश्‍न-पत्र, निबंध, तथा अंग्रेजी और प्रादेशिक भाषा का एक-एक अनिवार्य प्रश्‍न-पत्र होता है।

अंतिम चरण में साक्षात्‍कार होता है। इसका अधिकांश भाग हाईस्‍कूल, इंटर एवं ग्रेजुएशन के पाठ्यक्रम का समेकित रूप है। यदि छात्र आगे चलकर आईएएस परीक्षा में सम्मिलित होना चाहते हैं तो वे इसकी तैयारी इंटर से ही करना प्रारम्‍भ कर दें। इससे उन्‍हें अपनी पढ़ाई बोझिल न लगकर उद्देश्‍य का मार्ग प्रतीत होगी। ये पढ़ाई उनको इंटर एवं ग्रेजुएशन में अच्‍छे अंक प्राप्‍त करने में भी सहायक होगें तथा उन्‍हें अपने ‘लक्ष्य‘ को प्राप्‍त करने में उत्‍प्रेरक का भी कार्य करेंगें।

जिस प्रकार से छात्र अन्‍य कोर्सों तथा परीक्षा की तैयारी हेतु अपने अभिभावक, अध्‍यापक या मार्गदर्शक की सलाह के अनुसार आगे बढ़ते हैं, वैसे ही उन्‍हें आईएएस परीक्षा में उनका सहयोग लेकर आज से ही प्रयास करना चाहिए। ऐसे छात्रों को मार्गदर्शन के लिए कुछ प्रा‍थमिक क्रियाविधियां बतायी जा रही हैं। वे चाहे तो इन्‍हें अपनाकर आज से ही अपने लक्ष्‍य की ओर एक कदम आगे बढ़ा लें।

  1. कक्षा छ: से लेकर इन्‍टर तक की सभी विषयों की (NCERT) एनसीईआरटी की किताबों का अध्‍ययन करना।
  2. कठिन प्रतीत होने वाले विषयों में कमियों को दूर करना।
  3. अभी से लेखन का अभ्‍यास करना।
  4. समसाययिक विषयों की जानकारी के लिए न्‍यूजपेपर पढ़ना, टी. वी. रेडियो पर समाचार सुनना तथा न समझ आने वाले मुद्दों को अपने अभिभावक या मार्गदर्शक से समझने का प्रयास करना।
  5. छात्रों को सिविल सेवा परीक्षा में मार्गदर्शन तथा रणनीति के जानकारी के लिए हमारी वेबसाईट और फेसबुक पेज से जुड़े कर जानकारी प्राप्त कर सकते है।

अगर आप के पास भी कुछ ऐसे ही टिप्स हैं तो नीचे कमेंट बॉक्स में शेयर कर सकते हैं। इस पोस्ट को शेयर करना न भूलें।

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