Inspirational Story: दर्जी के बेटे निरीश राजपूत ने UPSC की परीक्षा में हासिल किए 370वीं रैंक, कभी बेचता था अखबार

0
994
success story of nirish rajput upsc

UPSC की परीक्षा को पास करना ज्यादातर युवाओं का सपना होता है लेकिन इसे पूरा बहुत कम लोग ही कर पाते हैं। ऐसे में निरीश राजपूत ने ना सिर्फ अपने सपने को पूरा किया बल्कि साबित किया कि मेहनत से कुछ भी पा सकते हैं।

निरीश के पिता कपड़ों की सिलाई का काम करते थे। महज़ 15 बाय 40 फीट के छोटे से मकान में निरीश अपने 3 भाई-बहिनों और माता-पिता के साथ रहते थे। बचपन से ही मेधावी छात्र रहे निरीश की पढ़ाई सरकारी स्कूल में हुई। पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए निरीश ने अखबार बांटने का काम किया। वे पिता के साथ सिलाई में भी हाथ बंटाते थे।

निरीश ने अपनी प्रतिभा के दम पर 10 वीं में 72 प्रतिशत अंक हासिल किए। आगे की पढ़ाई के लिए वे ग्वालियर आ गए जहां उन्होंने सरकारी कॉलेज से बीएससी और एमएससी दोनों में पहला स्थान हासिल किया। यहां वे पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट टाइम जॉब करते हुए सिविल सर्विसेज की तैयारी करने लगे।

निरीश राजपूत को चौथे प्रयास में 370वीं रैंक हासिल हुई थी। इनके दोनों भाई शिक्षक हैं ऐसे में उन्होंने ना सिर्फ निरीश को प्रोत्साहित किया बल्कि अपनी जमा पुंजी भी नीरीश को सौंप दी। परिवार से सप्रोट मिलने के बावजूद उनकी परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही थी।

उनके एक दोस्त ने उत्तराखंड में नया कोचिंग इंस्टीट्यूट खोला और निरीश को यहां पढ़ाने के लिए कहा गया। इसके बदले में निरीश से दोस्त ने वादा किया था कि बदले में उन्हें स्टडी मैटेरियल दिए जाएंगे।

दो साल बाद इंस्टीटयूट अच्छा प्रदर्शन करने लगी तो दोस्त ने निरीश को जॉब से निकाल दिया। दो साल तक निरीश अपनी पढ़ाई पर पूरी तरह से ध्यान नहीं दे पा रहे थे। अपने साथ हुए धोखे से उन्होंने सबक ली और दिल्ली चले आए। निरीश को ये रैंक बिना किसी कोचिंग के हासिल हुई है।

दिल्ली में कुछ ही समय में उनके दोस्त बन गए है। उनके पास अधिक पैसे नहीं थे ऐसे में वो अपने दोस्त के नोट्स से पढ़ाई करते थे। नीरीश रोजाना 18 घंटे पढ़ाई करते थे। जिसके बाद उन्हें ये सफलता हासिल हुई थी।

तीन बार मिली शिकस्त

UPSC में तीन बार फेल होने के बावजूद निरीश ने हार नहीं मानी। आखिरकार वर्षों की मेहनत रंग लाई और अपने चौथे प्रयास में निरीश ने आईएएस ऑल इंडिया मेरिट में 370 वीं रैंक हासिल कर पूरे देश में अपने परिवार का नाम रोशन किया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here