प्रेरणादायक! 35 से ज्यादा एग्जाम में फेल हो चुके हैं विजय वर्धन, फिर ऐसे UPSC में हासिल की 104 रैंक

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ips vijay wardhan

भारत की सबसे कठिन परिक्षों में से एक UPSC को पास करके आज विजय वर्धन IPS ऑफिसर बन चुके हैं। क्या किसी को यह बात पता है कि विजय वर्धन इस एग्जाम को पास करने से पहले 35 अन्य एग्जाम में फेल हो चुके हैं। इतने बार फेल होने के बावजूद भी उन्होने हार नहीं मानी और अपने निरंतर कोशिश और प्रयास के द्वारा IPS ऑफिसर बन गया।

असफ़लता से डर कर जो बैठ गया, वो कुछ नहीं कर पाता और जो असफ़लता से उभर गया वो विजय वर्धन कहलाता है। दरअसल, विजय वर्धन ने हर उस इंसान को आस दे दी है, जो सिविल सर्विस की परीक्षा को एक बार में नहीं पास कर पाए हैं।

विजय हरियाणा के सिरसा जिले के रहने वाले हैं। सिविल सर्विस की परीक्षा से पहले विजय ने 35 से ज्यादा कॉम्पेटेटिव एग्जाम में फेल हो चुके थे। ये ए और बी लेवल की परीक्षा थी। साल 2019 से पहले विजय चार सिविल सर्विस एग्जाम के चार अटेंप्ट दे चुके थे।

विजय के मुताबिक

उनसे करीबियों ने कहा कि वह ये अटेंप्ट न दें। हालांकि, विजय वर्धन ने हार नहीं मानी। इसके बाद पांचवे अटेंप्ट में उन्हें अपनी मंजिल मिल गई। विजय ने साल 2013 में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन से इंजीनियरिंग की है।

साल 2013 में आए दिल्ली

विजय के मुताबिक वह साल 2013 में पढ़ाई के बाद दिल्ली सिविल सर्विस की तैयारी करने के लिए दिल्ली आए थे। विजय कहते हैं कि साल 2014 में मैंने आईएएस की प्रारंभिक परीक्षा के बाद मेन्स की परीक्षा दी। हालांकि, वह असफल रहे। वहीं, 2015 में फिर मेन्स की परीक्षा में असफल रहे।

साल 2016 में विजय ने मेन्स की परीक्षा क्वालिफाई कर इंटरव्यू तक पहुंच गए। इस साल वह महज छह नंबर से रह गए थे। साल 2017 में वह फिर इंटरव्यू स्टेज में पहुंचने के बाद फिर असफल रह गए। विजय राजस्थान सिविल सर्विस, हरियाणा सिविल सर्विस, यूपी सिविल सर्विस, एसससी सीजीएल में भी फेल चुके हैं।

सोचता था मेरे साथ ही क्यों

विजय ने कहा मैं काफी क्लोज मार्जिन से परीक्षा में रह जाता था। अगर परीक्षा में पास भी हो जाता तो कभी मेडिकल स्टैंडर्ड तो कभी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के कारण रह जाता था। ऐसे में मेरे मन में ख्याल आता था कि मैं ही क्यों?

विजय कहते हैं कि सिलेक्शन के बाद अब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तो मुझे एहसास होता है कि वह सभी असफलताएं मेरी लिए मील का पत्थर साबित हुई। इन्हीं असफलताओं ने मुझे यहां तक पहुंचाया है।

एक पत्थर हथौड़े के आखिरी वार से टूट जाता है इसका मतलब यह नहीं है कि पहला वार बेकार था। सफलता निरंतर प्रयास से मिलता है।

Source: timesnownews

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