कैसे एक दुकानदार की बेटी ने IAS अधिकारी बनने के लिए सभी बाधाओं का सामना किया!

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कुछ लोग परेशानियों के सामने घुटने टेक देते हैं। तो कुछ लोग परेशानियों को अपना हथियार बना लेते हैं। इसमें शक नहीं कि दिक्कतों के सामने इंसान का हौसला टूट जाता है। लेकिन सच ये भी है कि कठिन हालातों का सामना करके जो लोग मुकाम हासिल करते हैं। उनकी कामयाबी समाज के लिए नजीर बन जाती है।

यूपीएससी कड़ी मेहनत और समर्पण के बारे में है। यह क्रैक करने के लिए एक आसान परीक्षा नहीं है। आपको इसके लिए कड़ी मेहनत करनी होगी, आपको अपनी तैयारी के लिए अपना समय देना होगा। ऐसे कई उम्मीदवार हैं जो यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन फिर भी, वे परीक्षा को पास नहीं कर पा रहे हैं।

तो चिंता ना करें हम आपको प्रेरित रहने में मदद करने की कोशिश करेंगे।

श्वेता अग्रवाल उन सभी लोगों के लिए एक और प्रेरणा हैं जो यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं। हर साल यूपीएससी विभिन्न सिविल सेवाओं के लिए परीक्षा आयोजित करता है। २०१६ वह वर्ष है जो श्वेता के लिए भाग्यशाली है क्योंकि उसने परीक्षा पास की और देश भर में १९ रैंक हासिल की।

श्वेता ने केवल अपनी तैयारी करके ही एग्जाम क्लियर किया। उसने अपनी उपलब्धि पर सभी को गौरवान्वित किया। इसलिए, इस लेख में, हम आपको उसकी यात्रा और उन रणनीतियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो उसने अपनी तैयारी के दौरान की थीं। वह स्थिरता और धैर्य का एक शानदार उदाहरण है।

कैसे एक दुकानदार की बेटी ने IAS अधिकारी बनने के लिए सभी बाधाओं का सामना किया

श्वेता अग्रवाल के बारे में

  • नाम: श्वेता अग्रवाल
  • मां का नाम: प्रेमा
  • पिता का नाम: संतोष
  • उम्र: 29
  • राज्य: पश्चिम बंगाल
  • प्रयासों की संख्या: 2
  • श्रेणी: AIR 19
  • साल: CSE 2016
  • वैकल्पिक कोड: 39
  • वर्ग: सामान्य
  • गृहनगर: बंगाल
  • राष्ट्रीयता: भारतीय

मई 2016 को जब UPSC का परिणाम घोषित हुआ तब यह पता चला की भद्रेश्वर की रहने वाली एक छोटे दुकानदार की बेटी ने अपने दुसरे प्रयास में 19 वां स्थान हासिल किया है। उन्होंने गर्व से बताया की उनके परिवार ने कितनी गरीबी में रहते हुए भी उन्हें कैसे पढाया।

श्वेता 2014 में बनीं थी IPS

2014 में उन्होने UPSC परीक्षा पास की था लेकिन IPS के लिए ही चुनी गयी और हैदराबाद के राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में उनका परिक्षण हो रहा था। उन्हें IAS बनना था और वे इसकी तैयारी कर रही थी। परिणाम आने के कुछ क्षण पहले उन्होंने बंगाल IPS का कैडर के लिए आवेदन किया था।

वे बताती है कि कैसे गरीबी से लड़ते हुए उनके माता- पिता ने उन्हें अच्छी शिक्षा प्रदान की। श्वेता को अपने माता- पिता पर बेहद गर्व है। श्वेता ने अपनी स्कूलिंग सेंट जोसेफ बंदेल से पूरी की। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद सेंट जेबियर्स कॉलेज कोलकाता से अर्थशास्त्र में स्नातक किया।

यह हमेशा कहा जाता है कि मध्यमवर्गीय परिवार के माता पिता द्वारा लड़कियों को समर्थन देना बहुत मुश्किल होता है। लेकिन लैंगिक भेद-भाव समेत सभी प्रकार की बाधाओं को पीछे छोड़ते हुए श्वेता अग्रवाल और उनका परिवार बिना शर्त की जाने वाली मेहनत और लगन का उदाहरण है।

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