मिलिए- इस IAS ऑफिसर से, सरकारी स्कूलों के लिए किया ये खास काम

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IAS Priyanka Shukla

आज हम ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जो एक IAS ऑफिसर हैं और समाज की सेवा के साथ- साथ कई बच्चों के भविष्य को निखारने का काम कर रही हैं। बता दें, 2009 बैच की आईएएस ऑफिसर प्रियंका पहले डॉक्टरी की डिग्री ले चुकी हैं।

कैसे बनीं आईएएस

प्रियंका शुक्ला के आईएएस बनने के दो दिलचस्प वाकये हैं। पहला वाकया बचपन का है। जब प्रियंका के पिता उत्तराखंड में सरकारी नौकरी करते थे। तब परिवार हरिद्वार में रहता था। इस दौरान जब पिता बेटी प्रियंका को लेकर हरिद्वार कलेक्टर के दफ्तर और आवास की तरफ से गुजरते थे तो कहते थे-बेटी मैं भी दीवार पर टंगी नेमप्लेट पर इसी तरह तुम्हारा नाम देखना चाहता हूं। उस वक्त से प्रियंका ने कलेक्टर बनने का सपना देखना शुरू किया।

यशस्वी जशपुर

प्रियंका शुक्ला

जुलाई 2016 में उन्होंने उच्च माध्यमिक और उच्च विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा फैलाने के लिए अपने मिशन संकल्प के तहत ‘यशस्वी जशपुर’ नामक एक पहल की शुरूआत की। ट्रस्ट जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) द्वारा जमा किए गये फंड की सहायता से उन्होंने स्कूलों में व्यापक स्तर पर कई कार्यक्रम करवाएं, जिससे छात्रों के बीच जागरूकता उत्पन्न हुई और अच्छे रिजल्ट भी आए।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, जिले के 143 सरकारी स्कूलों में से लगभग 51 ने हाल ही में कक्षा X और बारहवीं राज्य बोर्ड परीक्षा में 100% पास प्रतिशत हासिल किया है। जिले में कक्षा X के लिए 89% और कक्षा 12वीं के लिए 93.5% के साथ उल्लेखनीय उच्च पास प्रतिशत है, जबकि राज्य औसत क्रमशः 68% और 77% है।

नेशनल अवार्ड्स से सम्मानित

डॉ प्रियंका शुक्ला कई नेशनल अवार्ड्स से सम्मानित हो चुकी हैं। वर्ष 2011 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी ने उन्हें ‘सेंसस सिल्वर मैडल’ से सम्मानित किया था। वर्ष 2013 में विधानसभा चुनाव के दौरान लोगों में मतदान के लिए जागरूकता फैलाने पर चुनाव आयोग से स्पेशल अवार्ड और लोकसभा इलेक्शन 2014 के लिए एप्रिसिएशन लेटर मिला।

राजनांदगांव जिले में साक्षरता के क्षेत्र में बेहतर काम के लिए भी वह राष्ट्रपति से अवार्ड पा चुकी हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के तत्कालीन राज्यपाल द्वय शेखर दत्त और बलरामदास टंडन भी उन्हें अवार्ड दे चुके हैं। डॉ शुक्ला मूलतः उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं।

प्रियंका सच में एक जुझारू ऑफिसर हैं, जो सभी के सशक्तिकरण में विश्वास रखती हैं। एक डॉक्टर के साथ-साथ एक सफल प्रशासनिक ऑफिसर के रूप में उनकी उपिस्थिति वाकई में समाज को मजबूती प्रदान कर रही है।

हम सलाम करते हैं ऐसे ऑफिसर को

जय हिन्द

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