इस मुस्लिम लड़के में समाज के लिए कुछ कर गुजरने की थी चाहत, UPSC पास कर पूरा करेगा सपना

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IAS Junaid Ahmad

बिजनौर के नगीना कस्बे में रहने वाले जुनैद अहमद का घर में खुशी का माहौल है। मध्यमवर्गीय मुस्लिम परिवार में रहने वाले जुनैद ने अपने पिता जावेद हुसैन और मां आयशा का सर फक्र से ऊँचा कर कर दिया है।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर आज सिविल सेवा परीक्षा 2018 के लिए अंतिम परिणाम घोषित किया और जुनैद अहमद UPSC के तीसरे टॉपर बने। कोचिंग क्लासेस के बजाय, उन्होंने अपनी सफलता के लिए इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी का भरपूर श्रेय दिया।

‘इंटरनेट आपकी बहुत मदद करता है’

Junaid Ahmad UPSC

एएनआई के साथ एक साक्षात्कार में, अहमद ने कहा, “मेरे पास वरिष्ठ लोगों द्वारा सुझाई गई कुछ किताबें थीं, जिन्होंने आधार बनाने में मदद की।”

“लेकिन इंटरनेट आपको बहुत मदद करता है, सब कुछ ऑनलाइन उपलब्ध है। इंटरनेट के उपयोग ने मेरी मदद की,” अहमद ने निशुल्क जानकारी की उपलब्धता की सराहना की।

“मुझे पास होने की उम्मीद थी लेकिन कभी भी 3 रैंक की उम्मीद नहीं थी,” उन्होंने कहा। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए, वह हर दिन पांच-छह घंटे पढ़ाई करते थे।

जुनैद अहमद ने बताया कि 10वीं और 12वीं की परीक्षा में 60 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। स्नातक के लिए एक पढ़ाई प्राइवेट विश्वविद्यालय से की। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान मन ये ख्याल आया कि समाज के लिए कुछ करना है। मन में इस विचार के बाद ही आईएएस बनने की ठानी और लगातार कोशिश करता गया। पिछले चार सालों की तैयारी के बाद, पांचवीं कोशिश में सफल हुआ।

आईएएस, आईपीएस, आईएफएस आदि जैसी विभिन्न सेवाओं की नियुक्ति के लिए आयोग द्वारा कुल 759 उम्मीदवारों (577 पुरुष और 182 महिला) की सिफारिश की गई है।

नीचे आप जुनैद अहमद का इंटरव्यू देख सकते हैं।

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